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नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!

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नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2027 की भव्य शुरुआत; वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष से गूंज उठा रामतीर्थ, हजारों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक पल के साक्षी

✍🏻रविंद्र नेरकर

नासिक: गोदावरी का पवित्र तट... वैदिक मंत्रों की गूंज... शंखनाद से गुंजायमान आसमान... भगवा ध्वज और साधु-संतों की उपस्थिति में उमड़ा आस्था का सैलाब! शनिवार को नासिक के ऐतिहासिक रामतीर्थ पर ऐसा अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य दिखाई दिया, जिसने भारतीय सनातन संस्कृति की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोपहर 12 बजकर 2 मिनट के शुभ मुहूर्त पर धर्मध्वजा फहराकर नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ महापर्व 2027 की औपचारिक शुरुआत की। जैसे ही भगवा धर्मध्वजा आसमान में लहराई, पूरा गोदावरी तट शंखनाद, मंगलवाद्यों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गूंज उठा। 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आयोजित होने वाले इस धार्मिक महापर्व की शुरुआत ने नासिक के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। हजारों श्रद्धालु, देशभर से पहुंचे साधु-संत, विभिन्न अखाड़ों के महंत और अनेक गणमान्य व्यक्ति इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।


पहले यज्ञकुंड में आहुति, फिर गोदावरी पूजन; राष्ट्रपति ने विधि-विधान से फहराई धर्मध्वजा

धर्मध्वजारोहण समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वप्रथम यज्ञकुंड में आहुति अर्पित की। इसके बाद उन्होंने जीवनदायिनी मां गोदावरी का विधिवत पूजन किया। राष्ट्रपति ने धर्मध्वजा को नमन करते हुए ध्वजपूजन किया। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच उनके हाथों धर्मध्वजारोहण का ऐतिहासिक क्षण संपन्न हुआ। धर्मध्वजा के फहराते ही शंखनाद और मंगलवाद्यों की ध्वनि से पूरा रामतीर्थ परिसर गूंज उठा। इस दौरान मंत्रपुष्पांजलि अर्पित की गई। यज्ञाहुति, गोदावरी पूजन, ध्वजपूजन और धर्मध्वजारोहण के इन धार्मिक अनुष्ठानों ने सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया। धार्मिक अनुष्ठानों का पौरोहित्य पुरोहित संघ के सतीश शुक्ल और अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी ने किया।


नासिक में राष्ट्रपति, त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री ने फहराई धर्मध्वजा

सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक ही शुभ मुहूर्त पर धर्मध्वजारोहण किया गया।

नासिक के रामतीर्थ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मध्वजा फहराई, जबकि त्र्यंबकेश्वर के पवित्र कुशावर्त तीर्थ क्षेत्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों ध्वजपूजन और धर्मध्वजारोहण संपन्न हुआ।


दोनों प्रमुख तीर्थस्थलों पर आयोजित इन समारोहों के साथ आगामी सिंहस्थ कुंभ महापर्व की औपचारिक शुरुआत हुई। संत-महंतों की उपस्थिति से रामतीर्थ बना आध्यात्मिक संगम


इस ऐतिहासिक समारोह में विभिन्न अखाड़ों के संत-महंतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।समारोह में जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज, श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज, मंगलपीठाधीश्वर श्री 1008 माधवाचार्य महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, श्री पंच निर्मोही अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज, महंत संजयदास महाराज, श्रीमहंत मुरलीदास महाराज, श्रीमहंत वैष्णवदास महाराज, पंच दिगंबर अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत माधवदास महाराज, श्रीमहंत मोहनदास महाराज, महंत भक्तिचरणदास महाराज तथा महंत रामस्नेही महाराज सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।विभिन्न अखाड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को आस्था, ज्ञान, तपस्या और सनातन संस्कृति के संगम का स्वरूप प्रदान किया।


राज्यपाल, उपमुख्यमंत्रियों सहित कई केंद्रीय और राज्य मंत्रियों की उपस्थिति

इस भव्य समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, केंद्रीय आयुष तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव, नासिक के पालकमंत्री गिरीश महाजन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल, स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, विपणन एवं राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल, वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे, खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल तथा मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त महापौर हिमगौरी आडके-आहेर, सांसद राजाभाऊ वाजे, सांसद भास्कर भगरे तथा सांसद डॉ. शोभा बच्छाव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने समारोह में भाग लिया।


12 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त, अब सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को मिलेगी नई गति

सिंहस्थ कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का महापर्व है। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह महापर्व विभिन्न भाषाओं, प्रांतों, संप्रदायों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोता है।


राष्ट्रपति के हाथों संपन्न धर्मध्वजारोहण ने आगामी सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारियों को भी विशेष महत्व प्रदान किया है।

देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नासिक और त्र्यंबकेश्वर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन की ओर से सड़कें, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिंहस्थ कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित धार्मिक अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।


वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दर्ज कराई उपस्थिति - समारोह में विधायक सुहास कांदे, गोकुल गिते, राहुल ढिकले, देवयानी फरांदे, सीमा हिरे, सरोज अहिरे और दिलीप बनकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।इसके अलावा विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, सिंहस्थ कुंभमेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह, उपमहापौर विलास शिंदे, महानगरपालिका आयुक्त मनीषा खत्री, नासिक महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण के महानगर आयुक्त जलज शर्मा, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, सार्वजनिक निर्माण विभाग की मुख्य अभियंता अरुंधती शर्मा, अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पवार तथा कुंभमेला प्राधिकरण के अतिरिक्त आयुक्त कमलाकर रणदिवे और प्रमोद पवार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


विशेष : 51 फीट ऊंचे ध्वजस्तंभ पर फहराई धर्मध्वजा, हर प्रतीक का है आध्यात्मिक महत्व

नासिक के रामकुंड परिसर में पंचधातु से निर्मित 51 फीट ऊंचे मुख्य ध्वजस्तंभ पर फहराई गई धर्मध्वजा धार्मिक आस्था और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है।


धर्मध्वजा पर अंकित प्रत्येक शुभचिह्न का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।

- अमृतकलश : अमरत्व, मोक्ष और देवी शक्ति का प्रतीक।

- ॐ (ओंकार) : सकारात्मक ऊर्जा, संपूर्ण ब्रह्मांड और सर्वव्यापकता का प्रतीक।

- श्री : विजय, समृद्धि और मंगल का प्रतीक।

- 12 रेशमी गुच्छे : सामाजिक एकता, संगठन और सामूहिक शक्ति का संदेश।

- घंटियां और घुंघरू : पवित्र नाद, अंतर्नाद और ब्रह्मनाद के प्रतीक।

- मगरमच्छ : मां गोदावरी के वाहन का प्रतीक।

- सूर्य और चंद्रमा : निरंतरता और चिरंतन धार्मिक परंपरा के प्रतीक।

इस धर्मध्वजा की विशेष बनावट और पारंपरिक शुभचिह्न सिंहस्थ कुंभ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं।


गोदावरी के तट से दुनिया को आस्था और सनातन संस्कृति का संदेश

शनिवार को रामतीर्थ पर आयोजित धर्मध्वजारोहण समारोह ने नासिक की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान दी। गोदावरी के पवित्र तट पर फहराई गई भगवा धर्मध्वजा ने आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं को मानो आध्यात्मिक आमंत्रण दिया।

एक ओर हजारों वर्षों की संतपरंपरा और धार्मिक आस्था का गौरवशाली इतिहास, तो दूसरी ओर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होने की दिशा में आगे बढ़ता नासिक शहर—इन दोनों का अद्भुत संगम इस ऐतिहासिक अवसर पर दिखाई दिया।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों फहराई गई धर्मध्वजा केवल सिंहस्थ कुंभ के आगमन की घोषणा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की चिरंतन आस्था, संतपरंपरा के गौरव और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति का प्रतीक बन गई।

गोदावरी के पवित्र तट से उठी शंखनाद की गूंज ने पूरे देश को एक संदेश दिया—आस्था का महासंगम फिर लौट रहा है, सनातन संस्कृति का सबसे भव्य आध्यात्मिक उत्सव एक बार फिर नासिक-त्र्यंबकेश्वर की धरती पर इतिहास रचने को तैयार है!

नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!नासिक गोदावरी तट पर गूंजा सिंहस्थ का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराई धर्मध्वजा; कुंभ महापर्व का ऐतिहासिक आगाज!

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