मुंबई: मशहूर रम ब्रांड 'ओल्ड मॉन्क' बनाने वाली कंपनी ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली। कंपनी ने महाराष्ट्र में इस ड्रिंक की बिक्री पर FSSAI द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती दी थी। कंपनी का कहना है कि वह मंजूरी के लिए संशोधित लेबल सीधे रेगुलेटर (FSSAI) के पास जमा कराएगी।
मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की बेंच ने 'मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर ब्रुअरीज लिमिटेड' को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। यह कंपनी अपनी खोपोली स्थित यूनिट में 'ओल्ड मॉन्क' बनाती है और उसकी बॉटलिंग करती है।
FSSAI ने इस उत्पाद को 'रम' के तौर पर बेचे जाने पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इसमें अलग से फ्लेवर मिलाए गए हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इसे 'रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट' के रूप में लेबल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, FSSAI ने '7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' और 'वेरी ओल्ड वैटेड' जैसे दावों पर भी सवाल उठाए थे।
कंपनी ने रोक के आदेश को चुनौती दी
कंपनी ने इस रोक के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि उनके उत्पाद के फॉर्मूले सभी लागू नियमों के अनुरूप हैं। कंपनी ने यह भी दावा किया कि इस प्रतिबंध के कारण महाराष्ट्र को एक्साइज रेवेन्यू (आबकारी राजस्व) के रूप में 350 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।कंपनी अपने लेबल में बदलाव करने और FSSAI से नई मंजूरी लेने के लिए सहमत हो गई। इसके अनुसार, याचिका को वापस लिया हुआ मानकर निस्तारित कर दिया गया।

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