प्रशासन को दिया 30 दिन का अल्टीमेटम
ब्यूरो रिपोर्ट फरियाद अली
उ.प्र. बहराइच। गांव-गांव तक डिजिटल बैंकिंग पहुंचाने वाली 'बीसी सखियों' के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले पांच वर्षों से शासनादेशों की फाइलों में दबी सुविधाओं और आर्थिक तंगी से त्रस्त विशिष्ट कॉरस्पॉन्डेंट महिला उत्थान समिति की महिलाओं ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन की जिलाध्यक्ष शालिनी मिश्रा के नेतृत्व में भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाओं ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समिति ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ, तो जिले भर की बीसी सखियां कलेक्ट्रेट पर उग्र धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगी।
ज्ञापन में सबसे बड़ा मुद्दा खराब मशीनों और तकनीकी उपेक्षा का उठाया गया है। महिलाओं का कहना है कि बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई गई डिवाइसें कबाड़ हो चुकी हैं और बैंक अधिकारियों से कोई तकनीकी सहयोग नहीं मिलता, जिसके चलते ग्रामीणों का लेन-देन ठप पड़ा रहता है। वहीं, नए राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़ने के लिए लैपटॉप अनिवार्य किया जा रहा है, लेकिन न तो शासन स्तर से और न ही बैंकों की ओर से लैपटॉप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा 4,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय का जो वादा छह महीने के लिए किया गया था, वह भी कई बीसी सखियों के खातों में अधूरा या अटका पड़ा है।
समिति ने मांग उठाई है कि ग्राम पंचायत भवनों में उनके बैठने की स्थायी व समुचित व्यवस्था की जाए, बैंकों द्वारा अधिकृत पहचान पत्र (ID Card) जारी हों, नए शासनादेश लागू कर अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों से जोड़ा जाए और मनरेगा भुगतान का पूरा काम बीसी सखियों के जरिए कराया जाए ताकि उनका रोजगार सुरक्षित रह सके। ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सबकी निगाहें प्रशासन और बैंक प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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