रिपोर्ट : फरियाद अली | फाइट अगेंस्ट क्रिमिनल न्यूज़
नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित बड़े 'हल्लाबोल' विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली पुलिस के ट्रांसपोर्ट रेंज के जॉइंट कमिश्नर रजनीश गुप्ता (IPS) द्वारा डीएमआरसी (DMRC) के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कुमार को भेजे गए आधिकारिक पत्र के आधार पर आज रात 9:00 बजे से लेकर प्रदर्शन समाप्ति तक दिल्ली मेट्रो के 57 प्रमुख स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रखने का फैसला लिया गया है। लुटियंस दिल्ली, मध्य दिल्ली, पुरानी दिल्ली और सीमाओं से जुड़े 57 स्टेशनों पर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है, जबकि नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को भी रद्द कर दिया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए इस कदम के बाद राजधानी में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों ने केंद्र सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार जनता के शांतिपूर्ण विरोध और जनसैलाब से पूरी तरह घबरा गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करना और रेलगाड़ियों को रद्द करना यह दर्शाता है कि असंतोष की आवाज दबाने के लिए पूरी दिल्ली को बंधक बनाया जा रहा है। नेताओं ने सवाल किया कि यदि सरकार अपने फैसलों और नीतियों को लेकर आश्वस्त है, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आम जनजीवन और यातायात को ठप करने की क्या जरूरत थी?
दूसरी ओर, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अनिवार्य एहतियाती कवायद बताया है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि जंतर-मंतर और संवेदनशील प्रशासनिक इलाकों में अनियंत्रित भीड़ के घुसने से सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। किसी भी अप्रिय घटना, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए भीड़ को एक जगह जमा होने से रोकने के उद्देश्य से मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी कम करने की सिफारिश की गई।
इधर, 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने का मामला आज देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) भी पहुंच गया। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि इतने बड़े पैमाने पर मेट्रो और रेल सेवाएं बंद होने से लाखों आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक मजदूरों की रोजी-रोटी और आवाजाही पर गंभीर असर पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता'। अदालत के कड़े रुख के बाद केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि हालात की लगातार समीक्षा की जाएगी और आम जनता की परेशानी को ध्यान में रखते हुए मेट्रो स्टेशनों को नियंत्रित तरीके से खोलने पर विचार किया जाएगा।
बहरहाल, सरकार और प्रदर्शनकारियों के इस टकराव के बीच सबसे बड़ी मार दिल्ली-एनसीआर के आम यात्रियों पर पड़ रही है। अचानक 57 स्टेशन बंद होने और सीमाओं पर बैरिकेडिंग से सड़कों पर भीषण ट्रैफिक जाम की आशंका गहरा गई है। कल का दिन जहां प्रदर्शनकारियों के लिए शक्ति-परीक्षण का दिन होगा, वहीं प्रशासन के लिए शहर में शांति और व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है।

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