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पटाखा-मुक्त, प्लास्टिक-मुक्त, और प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाएं अपर जिलादंडाधिकारी वैशाली चव्हाण

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पटाखा-मुक्त, प्लास्टिक-मुक्त, और प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाएं अपर जिलादंडाधिकारी वैशाली चव्हाण

लियाकत शाह जलगांव.

दिवाली के मौके पर ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचने के लिए जिले के पटाखा विक्रेताओं और नागरिकों से अपील की गई है कि वे सरकार के बनाए नियमों का सख्ती से पालन करें. प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल न करें. पटाखे फोड़ने के लिए सिर्फ़ शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक का समय तय किया गया है. अपर जिला दंडाधिकारी वैशाली चव्हाण ने नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील की है.

भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार 125 डीबी से ज़्यादा आवाज़ करने वाले पटाखों का उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल ग़ैरक़ानूनी है. साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार बेरियम सॉल्ट, लिथियम, आर्सेनिक, लेड और मर्करी जैसे तत्वों वाले पटाखों के इस्तेमाल पर रोक है. इन तत्वों से जहरीली गैसें बनती हैं, जिनका जानवरों, पेड़-पौधों और इंसानी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। दिवाली के दौरान पटाखों से वायु प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी भी देखी गई है.

उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार पटाखा विक्रेताओं के लिए विस्फोटक अधिनियम 1884 और विस्फोटक नियम 2008 के प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली के 3 नवंबर 2023 के आदेश और मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार पटाखे फोड़ने के समय का पालन करना अनिवार्य है.

शैक्षणिक संस्थाओं से कहा गया है कि वे पटाखों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक करें. पुलिस प्रशासन आदेशों पर अमल कराए, जबकि महानगरपालिका और नगरपालिका के संबंधित अधिकारी नियमों के पालन की जांच कर सतर्कता बरतें.

मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ध्वनि और पर्यावरणीय प्रदूषण को लेकर नागरिकों की शिकायतें लेने के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जलगांव में नियंत्रण कक्ष शुरू किया गया है. नागरिक शिकायतों के लिए दूरभाष क्रमांक 0257-2221288 पर या srojalgaon@mpcb.gov.in ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं. प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार जरूरी कार्रवाई की जाएगी.

नागरिकों से अपील है कि वे मिट्टी के दीये और पणतियाँ जलाएँ, प्लास्टिक से बचकर काग़ज़ या कपड़े के आकाशकंदील लगाएं और पटाखों के इस्तेमाल से बचें. साथ ही प्लास्टिक की जगह कपड़े या कागज की थैलियों का इस्तेमाल करें, पेड़ों पर बिजली की रोशनी की सजावट न करें और बेकार तथा दोबारा इस्तेमाल होने लायक चीज़ों का उपयोग करें. अपर जिला दंडाधिकारी वैशाली चव्हाण ने पटाखा-मुक्त, प्लास्टिक-मुक्त, कचरा-मुक्त और प्रदूषण-मुक्त हरित दिवाली मनाने की अपील भी की है.

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