BREAKING
FAC News
Back

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर 11 नवंबर को नई दिल्ली में मुनअक़्क़िद होगी अहम राष्ट्रीय कौमी हम-मशवीरा

Tabish | | — views
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर 11 नवंबर को नई दिल्ली में मुनअक़्क़िद होगी अहम राष्ट्रीय कौमी हम-मशवीरा

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के तालीमी मिशन और राष्ट्र निर्माण में अज़ीम किरदार पर होगी ख़ुसूसी गुफ़्तगू, देश की नामवर शख़्सियात करेंगी शिरकत


(रिपोर्ट :- एडिटर जफरसिद्दीकी)


नई दिल्ली :- विशेष संवाददाता

तालीम, इल्म, क़ौमी यकजहती और मुल्क की तामीर के पैग़ाम को आम करने की ग़रज़ से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौक़े पर 11 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, लोधी रोड में एक अहम राष्ट्रीय संगोष्ठी मुनअक़्क़िद की जाएगी। इस कौमी हम-मशवीरा का मौज़ू ‘राष्ट्र निर्माण में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का किरदार’ रखा गया है।

सरहदी गांधी सद्भावना मंच के ज़ेरे-एहतिमाम होने वाले इस प्रोग्राम का मक़सद भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की तालीमी ख़िदमात, उनके अफ़कार, क़ौमी यकजहती, समाजी हमआहंगी और मुल्क की तरक़्क़ी में उनके नुमायां किरदार को नई नस्ल तक पहुंचाना है। मौलाना आज़ाद की शख़्सियत भारतीय इतिहास में इल्म, रौशन ख़याली, अमन और भाईचारे की एक अज़ीम मिसाल है।

मौलाना आज़ाद की तालीमी ख़िदमात पर होगी ख़ुसूसी गुफ़्तगू

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने मुल्क में तालीम के फ़रोग़, साइंसी सोच की तरक़्क़ी और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाने में अहम किरदार अदा किया। उनके नज़रियात आज भी नौजवानों के लिए रहनुमाई का ज़रिया हैं।

इस राष्ट्रीय कौमी हम-मशवीरा में मौलाना आज़ाद की ज़िंदगी, उनकी फ़िक्र, तालीमी मिशन और मुल्क की तामीर में उनके बेमिसाल योगदान के मुख़्तलिफ़ पहलुओं पर तफ़सील से रोशनी डाली जाएगी। साथ ही तालीम को समाजी तरक़्क़ी, क़ौमी इत्तेहाद और इंसानी हमदर्दी का मज़बूत ज़रिया बनाने पर भी तबादला-ए-ख़याल होगा।

मुमताज़ शख़्सियात की मौजूदगी से सजेगी कौमी हम-मशवीरा

इस अहम प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. एस.वाई. कुरैशी, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिरकत करेंगे।

प्रोग्राम की सदारत डॉ. सैयदा सैयिदैन हमीद करेंगी। वह नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन की अध्यक्ष, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी की पूर्व चांसलर तथा योजना आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य रह चुकी हैं।

प्रोग्राम का इस्तक़बालिया ख़िताब सरहदी गांधी सद्भावना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट सय्यद जलालुद्दीन पेश करेंगे।

देश के नामवर दानिशवर और माहिरान करेंगे ख़िताब

संगोष्ठी में जनाब एस. इरफान हबीब, इतिहासकार एवं लेखक; डॉ. अहमद अशफाक करीम, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं अल-करीम यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति; प्रो. (डॉ.) अबू सुफियान इस्लाही, अरबी विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी; सरदार दया सिंह, अध्यक्ष, ऑल इंडिया पीस मिशन; डॉ. एम.डी. थॉमस, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ हार्मनी एंड पीस; प्रो. (डॉ.) हरीश एस. वानखेड़े, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी; जनाब रियाज़ अहमद, लेखक, अनुवादक एवं स्तंभकार; जनाब ज़ेड.के. फ़ैज़ान, अधिवक्ता एवं पीपुल्स अवेयरनेस फोरम के अध्यक्ष; और मौलाना ज़ाहिद रज़ा रिज़वी समेत कई मुमताज़ शख़्सियात अपने ख़यालात का इज़हार करेंगी।

इन दानिशवरों और माहिरान की मौजूदगी से तालीम, तारीख़, समाजी हमआहंगी और क़ौमी यकजहती से जुड़े अहम मौज़ूआत पर संजीदा तबादला-ए-ख़याल की राह हमवार होगी।

तालीम, अमन-ओ-अमान और भाईचारे का दिया जाएगा पैग़ाम

इस कौमी हम-मशवीरा का एक अहम मक़सद समाज में तालीम की अहमियत को उजागर करने के साथ-साथ अमन-ओ-अमान, आपसी मोहब्बत, भाईचारे और क़ौमी एकता को मज़बूत करना भी है। आयोजकों की कोशिश है कि मौलाना आज़ाद के अफ़कार और उनकी रौशन ख़याली को आम करके नौजवानों में इल्म हासिल करने, समाज की ख़िदमत करने और मुल्क की तरक़्क़ी में अपना किरदार अदा करने का जज़्बा पैदा किया जाए।

मौलाना आज़ाद की ज़िंदगी इस बात की गवाह है कि तालीम महज़ डिग्री हासिल करने का ज़रिया नहीं, बल्कि इंसान की शख़्सियत संवारने, समाज में बेदारी पैदा करने और मुल्क को तरक़्क़ी की राह पर आगे बढ़ाने की बुनियाद है।

प्रोग्राम की तफ़सील

📅 तारीख़: 11 नवंबर 2026, बुधवार

🕰️ वक़्त: शाम 5:45 बजे

📍 मक़ाम: इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, 87-88, लोधी रोड, नई दिल्ली – 110003

🤝 इंतिज़ामिया: सरहदी गांधी सद्भावना मंच

📞 राब्ते का नंबर:

97113 37827

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर इल्म, इत्तेहाद और तरक़्क़ी का अहम पैग़ाम

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौक़े पर मुनअक़्क़िद होने वाली यह संगोष्ठी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की तालीमी विरासत को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने के साथ-साथ समाज में इल्म, शऊर, अमन, भाईचारे और क़ौमी यकजहती को फ़रोग़ देने की एक अहम कोशिश है। उम्मीद है कि इस प्रोग्राम के ज़रिये मौलाना आज़ाद के अफ़कार से नई नस्ल को रोशनी मिलेगी और मुल्क की तामीर में तालीम के किरदार को और ज़्यादा मज़बूती हासिल होगी।

How did you feel about this news?

Related News

Comments

Loading comments...

Related News