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सांताक्रुज़ में जश्न-ए-ग़ौसुल वरा और नियाज़-ए- ग़ौसिया की रूहानी महफ़िल में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम

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सांताक्रुज़ में जश्न-ए-ग़ौसुल वरा और नियाज़-ए-  ग़ौसिया की रूहानी महफ़िल में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम

हाजी इब्राहीम शेख भाईजान की मेहमाननवाज़ी, अकीदत और ख़ुलूस के हर तरफ़ चर्चे;


(रिपोर्ट : एडिटर जफ़रसिद्दीक़ी)


मुंबई,:- 12 अक्टूबर 2026। मुंबई के सांताक्रुज़ पश्चिम स्थित हसनाबाद, गली नंबर 2 के अशियाना अपार्टमेंट में रविवार, 11 अक्टूबर को जश्न-ए-ग़ौसुल वरा, जुलूस-ए-ग़ौसिया और नियाज़-ए-ग़ौसिया की अज़ीमुश्शान रूहानी महफ़िल निहायत अकीदत, एहतराम और रूहानियत के माहौल में मुनअक़्क़िद हुई। इस मुबारक मौक़े पर हज़ारों अकीदतमंदों ने शिरकत करके सरकार गौस-ए-आज़म, हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाहि अलैह के प्रति अपनी बेपनाह मोहब्बत और अकीदत का इज़हार किया।

इस अज़ीमुश्शान तक़रीब का एहतिमाम हर साल की तरह इस साल भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्ट्र उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र हज कमिटी के साबिक़ सदर हाजी इब्राहीम शेख भाईजान की जानिब से किया गया। उनके अपार्टमेंट पर सजे इस रूहानी आयोजन में मुंबई के अलावा दीगर शहरों से भी सियासी रहनुमाओं, समाजी ख़िदमतगारों, उलमा-ए-किराम, पार्टी पदाधिकारियों और मुख़्तलिफ़ समाजी व दीनी तंजीमों से जुड़े लोगों ने शिरकत की।

महफ़िल में अकीदतमंदों की कसीर तादाद, उलमा-ए-किराम की मौजूदगी और मेहमानों के इस्तक़बाल के लिए किए गए इंतज़ामात ने आयोजन को ख़ास बना दिया।

नवाब मलिक, आरिफ़ नसीम ख़ान और वारिस पठान समेत कई नामचीन शख़्सियात की मौजूदगी

इस रूहानी महफ़िल में साबिक़ वज़ीर नवाब मलिक, साबिक़ वज़ीर आरिफ़ नसीम ख़ान और साबिक़ विधायक वारिस पठान समेत कई नामवर सियासी रहनुमाओं ने ख़ुसूसी शिरकत की।

इसके अलावा हसन मुश्रीफ़ साहब के भांजे ज़ुबैर साहब, सीनियर कांग्रेसी रहनुमा क़य्यूम तांबोली, एनसीपी के उत्तर मध्य ज़िला सदर अरशद अमीर और एनसीपी मुंबई के जनरल सेक्रेटरी ग़फ़्फ़ार ख़ान समेत कई मुअज़्ज़िज़ शख़्सियात भी इस मौक़े पर मौजूद रहीं।

मुंबई के साथ-साथ औरंगाबाद, जिंतूर, अहमदनगर और दीगर शहरों से आए सियासी व समाजी हलक़ों से जुड़े लोगों ने भी महफ़िल में शिरकत की। इस तरह यह आयोजन अकीदत के साथ-साथ आपसी मुलाक़ात, मेल-मिलाप और भाईचारे का अहम मरकज़ बना।

हाजी इब्राहीम शेख भाईजान और उनकी टीम ने किया पुरख़ुलूस इस्तक़बाल

महफ़िल में आने वाले तमाम मेहमानों और अकीदतमंदों का हाजी इब्राहीम शेख भाईजान ने अपने फ़रज़ंदों आरिफ़ शेख, असद शेख, अरशद शेख और फ़हीम शेख के साथ निहायत ख़ुलूस, मोहब्बत और एहतराम से इस्तक़बाल किया।


इस मौक़े पर उनकी पूरी टीम, दोस्त-अहबाब और समाजी ख़िदमतगारों ने भी मेहमानों की ख़िदमत में हिस्सा लिया। हर आने वाले मेहमान के साथ अपनाइयत, ख़ुश-अख़लाक़ी और मोहब्बत का बरताव इस तक़रीब की ख़ास पहचान रहा।

हाजी इब्राहीम शेख भाईजान की जानिब से हर साल नियाज़-ए-ग़ौसिया का एहतिमाम किया जाना बुज़ुर्गाने-दीन से उनकी अकीदत और मोहब्बत का इज़हार है। इस साल भी उन्होंने जिस अंदाज़ में मेहमानों की मेहमाननवाज़ी की, वह महफ़िल में शामिल लोगों के लिए ख़ास तवज्जोह का मरकज़ रहा।

सैकड़ों समाजसेवकों की ख़ुसूसी शिरकत

इस अज़ीमुश्शान नियाज़-ए-ग़ौसिया में हाजी इब्राहीम शेख भाईजान की पूरी टीम, दोस्त-अहबाब और समाजी ख़िदमतगारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।



महफ़िल में शामिल लोगों की कसीर तादाद ने आयोजन की रौनक़ में इज़ाफ़ा किया। दोस्ती, भाईचारे और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने इस रूहानी तक़रीब को यादगार बना दिया।

क़ुरआन ख़्वानी, उलमा-ए-किराम के बयानात और जुलूस-ए-ग़ौसिया का एहतिमाम

तक़रीब के दौरान क़ुरआन ख़्वानी और उलमा-ए-किराम के बयानात का एहतिमाम किया गया। उलमा ने बुज़ुर्गाने-दीन की तालीमात, इंसानियत की ख़िदमत, ज़रूरतमंदों की मदद, आपसी मोहब्बत और मुआशरे में इत्तेहाद व भाईचारे की अहमियत पर रौशनी डाली।

उलमा-ए-किराम ने लोगों को नेक अमल, ख़ैरसगाली, आपसी एहतराम और इंसानी हमदर्दी के रास्ते पर चलने की तलक़ीन की। महफ़िल में शरीक अकीदतमंदों ने भी बुज़ुर्गाने-दीन की तालीमात से इस्तिफ़ादा किया।

इसके बाद नमाज़-ए-मग़रिब के पश्चात जुलूस-ए-ग़ौसिया का एहतिमाम किया गया। जुलूस में अकीदतमंदों ने पूरे एहतराम और अकीदत के साथ शिरकत की। ज़िक्र-ओ-अज़कार और नारे-ए-अक़ीदत से माहौल रूहानियत से सरशार नज़र आया।

मदरसों के बच्चों, नौजवानों, बुज़ुर्गों और दीगर अकीदतमंदों की मौजूदगी ने महफ़िल के दीनी और रूहानी पहलू को और भी नुमायाँ किया।

मुल्क की सलामती, तरक़्क़ी और अमन-ओ-अमान के लिए ख़ुसूसी दुआएं

नियाज़-ए-ग़ौसिया के इस मुबारक मौक़े पर मुल्क की सलामती, तरक़्क़ी व ख़ुशहाली, अमन-ओ-अमान और मुआशरे में इत्तेहाद व इत्तिफ़ाक़ क़ायम रहने के लिए ख़ुसूसी दुआएं की गईं।

इसके साथ ही ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद, इंसानियत की ख़िदमत, आपसी मोहब्बत को फ़रोग़ देने और समाज में भाईचारे को मज़बूत बनाने का पैग़ाम भी दिया गया।

महफ़िल का बुनियादी मक़सद बुज़ुर्गाने-दीन की तालीमात को आम करना, लोगों के दिलों में मोहब्बत पैदा करना और मुआशरे में अमन, एकता तथा ख़ैरसगाली को फ़रोग़ देना रहा।

अकीदत, मेहमाननवाज़ी और भाईचारे की मिसाल बनी रूहानी महफ़िल

सांताक्रुज़ के अशियाना अपार्टमेंट में मुनअक़्क़िद जश्न-ए-ग़ौसुल वरा, जुलूस-ए-ग़ौसिया और नियाज़-ए-ग़ौसिया की यह अज़ीमुश्शान तक़रीब दीनी अकीदत के साथ-साथ समाजी यकजहती, आपसी मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम देने वाली साबित हुई।




हाजी इब्राहीम शेख भाईजान की मेहमाननवाज़ी, उनके फ़रज़ंदों और उनके कार्यकर्ता की पूरी टीम की ख़िदमात, सैकड़ों समाजसेवकों की शिरकत और उलमा-ए-किराम की मौजूदगी ने महफ़िल को ख़ास अहमियत दी।



सियासी रहनुमाओं, समाजी ख़िदमतगारों, दीनी शख़्सियात, मदरसों के बच्चों, नौजवानों और बुज़ुर्गों की कसीर तादाद ने इस आयोजन को अकीदत और मेल-मिलाप का यादगार मरकज़ बना दिया।

ग़ौस-ए-आज़म की अकीदत में सजी इस रूहानी महफ़िल ने मोहब्बत, ख़ुलूस, इत्तेहाद, इंसानियत और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का पैग़ाम आम किया। मुल्क की सलामती और अमन-ओ-अमान के लिए की गई ख़ुसूसी दुआओं के साथ यह महफ़िल रूहानियत और अकीदत की यादगार फ़िज़ा में इख़्तिताम-पज़ीर हुई।


इस मौक़े पर नामचीन समाजसेवक हाजी युसुफ़ क़ाज़ी, एडिटर जफ़रसिद्दीक़ी, हाजी रफ़ीक़ शेख, एडिटर अलीम शेख, समाजसेवक ईरशाद क़ाज़ी, रफ़ीक़ मामू, ज़िया भाई, शाकिर मंसूरी, चिराग़ शेख, नासिर ख़ान, रफ़ीक़ जरीवाला, सलीम ख़ान, मोईन अजमेरी, समाजी कार्यकर्ता फ़हीम शेख, शफ़ी शेख, जावेद अंसारी, अनवर सिद्दीक़ी, गुलफ़ाम ख़ान, फ़ज़ल सौदागर और जमील भाई समेत कई मुअज़्ज़िज़ शख़्सियात ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

इनके अलावा सैकड़ों समाजसेवक, समाजी कार्यकर्ता, मुख़्तलिफ़ तंजीमों के पदाधिकारी, उलमा-ए-दीन, मदरसों के बच्चे, नौजवान, बुज़ुर्ग और आम अकीदतमंद भी बड़ी तादाद में शरीक हुए।

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