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सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

Shoaib Miyanoor | | views
सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला



इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है।


*जस्टिस राज बीर सिंह* की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।


मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन को 'बेनेमी संपत्ति' बताते हुए जब्त किया गया, जिसे गाजीपुर के विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) ने भी सही ठहराया। हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत संपत्ति जब्त करने की शक्ति असीमित नहीं है। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति ने गैंग के सदस्य या संचालक के रूप में किसी अपराध से अर्जित धन से संपत्ति बनाई।


*अदालत ने कहा,*


“सिर्फ आरोप या संदेह के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती। अपराध और संपत्ति के बीच स्पष्ट संबंध होना अनिवार्य है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वास करने का कारण (Reason to Believe) केवल शक या अंदाजे पर आधारित नहीं हो सकता बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। इस मामले में अदालत ने पाया कि राज्य ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि संपत्ति अपराध से अर्जित धन से बनाई गई। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत यह जरूरी नहीं है कि संपत्ति वापस पाने के लिए व्यक्ति खुद अपनी आय का स्रोत साबित करे। पहले राज्य को यह सिद्ध करना होगा कि संपत्ति अपराध से जुड़ी है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मंसूर अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। हाइकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल मुख्तार अंसारी का रिश्तेदार होने के आधार पर संपत्ति जब्त करना पूरी तरह गलत है। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट और स्पेशल कोर्ट के आदेशों को मनमाना और बिना आधार बताते हुए रद्द कर दिया और राज्य सरकार को तत्काल संपत्ति मुक्त करने का निर्देश दिया।

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