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संघ के स्वयं सेवकों के त्याग और समर्पण ने समय की धारा को मोड़ दिया: भवानजी

FAC News Desk | | views
संघ के स्वयं सेवकों के त्याग और समर्पण ने समय की धारा को मोड़ दिया: भवानजी

,,,,,,,,,प्रसिद्धि पत्र,,,,,,,,,,,,,

मुंबई: वरिष्ठ हिंदूवादी भाजपा नेता और मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबू भाई भवानजी ने कहा है कि सौ साल की लंबी यात्रा में आर एस एस पर अनेक संकट आए लेकिन स्वयं सेवकों के त्याग, बलिदान, समर्पण,सेवा भावना और देशभक्ति ने समय की धारा को मोड़ दिया और आज यह संगठन देश का नीति निर्माता बन गया।

आज एक बयान में भवानजी ने कहा कि सौ साल की यात्रा में संघ पर सरकार ने तीन बार प्रतिबंध लगाया लेकिन वही सरकार आज उसी संघ डाक टिकट और सिक्का जारी कर रही है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय संघ के समर्पित मार्गदर्शकों और स्वयं सेवकों को जाता है।

 उन्होंने कहा कि संघ राष्ट्रवाद की पाठशाला है। यहां जो भी प्रवेश लेता है। उसे नियमित शाखा जाना पड़ता है। योग-व्यायाम, बौद्धिक, गणगीत, अमृत विचार आदि प्रतिदिन होते हैं। यही चीजे संघ के स्वयंसेवक को देशभक्ति से जोड़ती हैं और वह देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत हो उठता है।

भवानजी ने कहा कि संघ के स्वयं सेवक देश के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर काम करते हैं। क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरी है। उसी से सभी का वजूद है। देश पर जब भी समस्याएं आई हैं आरएसएस ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। संघ के स्वयंसेवक मदद के लिए हर जगह पहुंच जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना के समय संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक स्वप्रेरणा से सेवा कार्य के लिए जुट गया था। स्वयंसेवक बस्तियों में भोजन और राशन पहुंचा रहे थे। सेवा भारती के माध्यम से पूरे देश में करोड़ों लोगों की मदद की गई। स्वयंसेवक प्रवासी मजदूरों की चिंता कर रहे थे, उन्हें दवा पहुंचाना, जलपान कराना और साथ ही दूरदराज से निकले प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया। संघ के स्वयंसेवकों को कोई निर्देश नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि जिस दिन देश के सभी लोग संघ के विचार आत्मसात कर लेंगे उसी दिन भारत दुनिया की महाशक्ति बन जाएगा।

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