ठाणे:ठाणे शहर पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत आने वाले अंबरनाथ पुलिस थाने में २८ सितंबर २०२६ को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा १०३(१) के तहत हत्या का एक गंभीर मामला (गुना रजि. नं. ५३१/२०२६) दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए अपराध शाखा घटक-४, उल्हासनगर को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समानांतर जांच के आदेश दिए गए थे।आंध्र प्रदेश भागने की फिराक में था आरोपीजांच के दौरान पुलिस को अपने गुप्त मुखबिरों से पक्की जानकारी मिली कि हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अपने मूल गांव चिंतागुंडा (आंध्र प्रदेश) भागने की योजना बना रहा है। वह मुंबई से ट्रेन पकड़ने के इरादे से कल्याण रेलवे स्टेशन की ओर निकला था।कल्याण रेलवे स्टेशन पर बिछाया गया जालक्राइम ब्रांच के अधिकारियों और अंमलदारों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुल ०३ विशेष टीमें गठित कीं। इन टीमों ने कल्याण रेलवे स्टेशन परिसर और वहां से छूटने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियों में सघन जांच अभियान शुरू किया। तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों से प्राप्त फोटो के जरिए संदिग्धों पर नजर रखी गई।तभी जनरल बोगी में तलाशी के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया, जिसकी पहचान गोविंद रामलु कोहली उर्फ चिन्ना (उम्र ३० वर्ष) के रूप में हुई। वह अंबरनाथ पश्चिम के पुराने बालाजी नगर, जयलक्ष्मी किराना स्टोर्स के पास का रहने वाला है।पैसे और गणपति चंदे के विवाद में ली जानपुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में आरोपी गोविंद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि अंबरनाथ पश्चिम के पुराने बालाजी नगर में रहने वाले उसके दोस्त संदीप दिलीप मढीवाल (उम्र लगभग २५ वर्ष) से उसका विवाद हुआ था। संदीप ने ओबीएन मित्र मंडल की ओर से आयोजित 'गणपति उत्सव' के लिए आरोपी के पास जमा चंदे के पैसों के बारे में पूछताछ की थी। इसी बात से नाराज होकर आरोपी गोविंद ने संदीप को रास्ते से हटाने की साजिश रची और उस पर जानलेवा हमला कर उसकी हत्या कर दी।पुलिस टीम को मिली सराहनाउल्हासनगर क्राइम ब्रांच यूनिट-४ ने तकनीकी सहायता और कुशल नेटवर्क के दम पर इस अंधे कत्ल की गुत्थी को महज १२ घंटों के भीतर सुलझा लिया।यह सफल कार्रवाई पुलिस सह आयुक्त (अपराध) डॉ. पंजाबराव उगले, पुलिस उप आयुक्त (अपराध) श्री अमरसिंह जाधव और सहायक पुलिस आयुक्त श्री शेखर बागडे के मार्गदर्शन में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेश गज्जल, सपोनि श्रीरंग गोसावी और उनकी पूरी टीम (मिलिंद हिंदूराव, सुरेश जाधव, शेखर भावेकर, मंगेश जाधव, गणेश गावडे, राजेंद्र थोरवे, अशोक थोरवे, अमर कदम, प्रसाद तोंडलीकर, बाबूलाल जाधव और रामदास उगले) द्वारा अंजाम दी गई है।
उल्हासनगर क्राइम ब्रांच (यूनिट-४) की बड़ी कामयाबी, १२ घंटे के भीतर हत्यारोपी गिरफ्तार; गणपति उत्सव के चंदे के विवाद में की थी हत्या
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