मुंबई: मुंबई पुलिस के अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) कक्ष ४ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए २०१८ के एक संवेदनशील अपहरण और फिरौती के मामले में आरोपियों को दोषसिद्ध (दोषी साबित) कराने में कामयाबी हासिल की है। कोर्ट ने इस मामले के आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला ३ अगस्त २०१८ का है, जब एक १३ वर्षीय लड़का अकेले अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान अज्ञात बदमाशों ने फिरौती वसूलने के इरादे से उसका अपहरण कर लिया था। इस संबंध में विनोबा भावे नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी और मामला दर्ज किया गया था।
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए इसे आगे की जांच के लिए तुरंत मुंबई क्राइम ब्रांच के 'गुन्हे प्रकटीकरण शाखा, कक्ष ४' को सौंप दिया गया।
क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई
मामला हाथ में आते ही क्राइम ब्रांच कक्ष ४ ने तेजी से अपनी जांच शुरू की। ६ अगस्त २०१८ को पुलिस टीम ने आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके चंगुल से अगवा किए गए बच्चे को सुरक्षित छुड़ा लिया। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ मजबूत और पुख्ता सबूत जुटाकर कोर्ट में चार्जशीट (दोषारोप पत्र) दाखिल की गई थी।
कोर्ट ने सुनाई सजा
३० अक्टूबर २०२६ को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपियों को निम्नलिखित सजा सुनाई है:
• भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा ३२८ के तहत: ३ वर्ष की सजा।
• धारा ३६३ के तहत: २ वर्ष की सजा।
• धारा ३२४ के तहत: २ वर्ष की सजा।
• धारा ३४३ के तहत: १ वर्ष की सजा।
• इसके साथ ही आरोपियों पर ३,५०० रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इस टीम ने की कार्रवाई
इस महत्वपूर्ण मामले को अंजाम तक पहुंचाने में मुंबई के पुलिस आयुक्त श्री विवेक फणसळकर, विशेष पुलिस आयुक्त श्री देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) श्री लखमी गौतम, अपर पुलिस आयुक्त (क्राइम) श्री शशिकांत सातव, पुलिस उप आयुक्त (प्रकटीकरण) और सहायक पुलिस आयुक्त के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच कक्ष ४ के प्रभारी अधिकारी व उनकी टीम (जिसमें स.पो.नि. अजय बिराजदार, कोर्ट पैरवी म.पो.शि.क्र. ०९१५४७/सुरेखा पाटील शामिल हैं) ने बेहद सराहनीय भूमिका निभाई।

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