अमन, इंसानियत और भाईचारे के पैग़ाम को लेकर एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन की पुरअसर रहनुमाई में प्रतिनिधियों ने लिया एकजुटता का अज़्म
नफ़रत की दीवारें गिराकर मोहब्बत, इंसानियत और कौमी एकजुटता मज़बूत करने का लिया अहद
मुंबई :- सरहदी गांधी सद्भावना मंच की जानिब से शनिवार, 5 सितंबर 2026 को मरोल, अंधेरी ईस्ट स्थित Sanabil Banquets में एक अहम और पुरख़ुलूस प्रतिनिधि बैठक का इनइक़ाद किया गया। बैठक की सदारत मंच के राष्ट्रीय सदर एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने की। इस मौक़े पर समाज के मुख़्तलिफ़ शोबों से जुड़े नुमाइंदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं और नामचीन शख्सियात समेत सैकड़ों पदाधिकारियों ने शिरकत की।
बैठक में वतन-ए-अज़ीज़ के मौजूदा हालात, अमन-ओ-सद्भावना, इंसानियत, भाईचारे और कौमी एकजुटता जैसे अहम मौज़ूआत पर तफ़सीली गुफ़्तगू और ग़ौर-ओ-फ़िक्र किया गया। साथ ही समाज के कमज़ोर और ज़रूरतमंद तबक़ों की मदद, तालीम, सेहत, रोज़गार तथा सामाजिक रहनुमाई के लिए ठोस और मुनज़्ज़म कोशिशें करने पर ज़ोर दिया गया।
अमन, इंसानियत और भाईचारे को फ़रोग़ देना वक़्त की अहम ज़रूरत
अपने ख़िताब में एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने कहा कि मौजूदा दौर में समाज को जोड़ने वाली सोच और अमन की आवाज़ को मज़बूत करने की बेहद ज़रूरत है। ज़रूरतमंद और परेशान लोगों का सहारा बनना, उनके मसाइल को समझना और उनके हक़ की आवाज़ को पुरअसर अंदाज़ में उठाना हम सबकी सामाजिक ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती दूरियों, ग़लतफ़हमियों और नफ़रत को बातचीत, मोहब्बत, इंसानी हमदर्दी और भाईचारे के ज़रिए दूर किया जाना चाहिए। सद्भावना और इंसानियत किसी एक तबक़े तक महदूद नहीं, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला पैग़ाम है।
मुस्लिम समाज के अहम मसाइल पर तफ़सीली तबादला-ए-ख़याल
बैठक में मुस्लिम समाज से जुड़े अहम मसाइल पर भी तफ़सीली गुफ़्तगू हुई। खास तौर पर मेडिकल लाइन, तालीम, रोज़गार, नौकरी के मौक़े, हुनरमंदी और समाज के ज़रूरतमंद लोगों की मदद जैसे मुद्दों पर तवज्जो दिलाई गई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज की असल तरक़्क़ी केवल नारों से नहीं, बल्कि तालीम, हुनर, रोज़गार, सेहत और सही सामाजिक रहनुमाई से मुमकिन है। इसके लिए ज़मीनी सतह पर जागरूकता पैदा करने और ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाने की कोशिशों को और मज़बूत किया जाना चाहिए।
नफ़रत की दीवारें गिराकर मोहब्बत के रिश्ते मज़बूत करने का अज़्म
बैठक में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया गया कि समाज के मुख़्तलिफ़ तबक़ात के बीच पैदा होने वाली ग़लतफ़हमियों और दूरियों को बातचीत और सद्भावना के ज़रिए दूर किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि सरहदी गांधी सद्भावना मंच का मिशन समाज के हर तबक़े के बीच अमन, मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे को मज़बूत करना है। आज समाज को जोड़ने वाली आवाज़ों की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। इसलिए सद्भावना का पैग़ाम घर-घर तक पहुँचाना हम सभी की साझा ज़िम्मेदारी है।
आज़ादी की जद्दोजहद में पुरख़ों की क़ुर्बानियों से नई नस्ल को कराया जाएगा रूबरू
बैठक में एक अहम पहल पर भी गुफ़्तगू हुई कि हिंदुस्तान की आज़ादी की जद्दोजहद में हमारे बुज़ुर्गों और विभिन्न समुदायों के लोगों की कुर्बानियों एवं योगदान से नई नस्ल को वाक़िफ़ कराया जाए।
इसके लिए स्कूलों और विभिन्न इलाक़ों में सेमिनार, जागरूकता कार्यक्रम और तारीखी मजलिसों के आयोजन पर ज़ोर दिया गया, ताकि बच्चों और नौजवानों को मुल्क की आज़ादी की तारीख़ और उसमें विभिन्न समुदायों के योगदान के बारे में सही जानकारी मिल सके।
वक्ताओं ने कहा कि नई नस्ल हमारा मुस्तक़बिल है। उसे मुल्क की तारीख़, आज़ादी की जद्दोजहद, बुज़ुर्गों की क़ुर्बानियों और सामाजिक ज़िम्मेदारियों से वाक़िफ़ कराना हमारी अहम ज़िम्मेदारी है।
कौम और समाज के मसाइल पर पुरअसर आवाज़ उठाने का फैसला
बैठक में यह भी तय किया गया कि समाज और कौम से जुड़े अहम मसाइल को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा। मंच की जानिब से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीक़े से जायज़ मुद्दों को संबंधित अधिकारियों एवं प्रशासन तक पहुँचाने तथा ज़रूरतमंदों की आवाज़ बनने की कोशिश की जाएगी।
प्रतिनिधियों ने एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन की फ़िक्र, दूरअंदेशी और रहनुमाई की सताइश करते हुए कहा कि अमन, इंसानियत और भाईचारे के लिए जिस ख़ुलूस और जज़्बे के साथ वह काम कर रहे हैं, वह क़ाबिल-ए-तारीफ़ है।
एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन की फ़िक्र को प्रतिनिधियों ने कहा ‘लब्बैक’
बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन की फ़िक्र और नज़रिये का पुरज़ोर समर्थन करते हुए हर मुमकिन सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अमन, इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे के इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
इस दौरान विभिन्न इलाक़ों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सामाजिक तजुर्बात और स्थानीय मसाइल भी सामने रखे तथा मंच की आगामी सरगर्मियों को ज़्यादा मुनज़्ज़म और असरदार बनाने के लिए कई अहम तजावीज़ पेश कीं।
सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के कार्यक्रमों को मिलेगी वुसअत
बैठक में आने वाले दिनों में सामाजिक जागरूकता, तालीम, सेहत, रोज़गार, इंसानी हमदर्दी, अमन-ओ-सद्भावना और कौमी एकजुटता से जुड़े कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने पर भी गुफ़्तगू हुई।
तमाम वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने इस बात पर इत्तेफ़ाक़ किया कि समाज की बेहतरी के लिए सिर्फ़ गुफ़्तगू नहीं, बल्कि ज़मीनी सतह पर लगातार और मुनज़्ज़म ख़िदमात को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।
कई नामचीन शख्सियात की मौजूदगी
इस अहम प्रतिनिधि बैठक में ईस्माईल मकवाना, मुंबई सरहदी गांधी सद्भावना मंच के सदर अरशद अमीर, ईरम रब्बानी, लोकप्रिय समाजसेवक गफ़्फ़ार खान, तहज़ीब आलमी, डॉ. आफ़ताब, प्रोफेसर हसनैन नक़वी, डॉ. ज़ाकिर, शमीम अब्बास, प्रोफेसर खलील ख़तीब, राशिद शेख, आज़म खान, जावेद अशरफ़ी, नोमान क़ाज़ी, साहिल सिद्दीकी, ज़ैद शेख, एडिटर जफर सिद्दीकी, मुख़्तार शेख, वसिम शेख, नवेद शेख, एडवोकेट अब्दुल रफ़ीक, उसमान खान लाला, अनीस शेख, साईना शेख, सादिया अख़्तर सहित बड़ी तादाद में पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का पूरा माहौल अमन, मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे के जज़्बे से सराबोर रहा। आख़िर में तमाम मेहमानों, प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा किया गया तथा वतन-ए-अज़ीज़ में अमन, खुशहाली, इंसाफ़ और भाईचारे के लिए मिल-जुलकर काम करने का अज़्म दोहराया गया।

Loading comments...