राजकोट (भायावदर):गुजरात के राजकोट ग्रामीण इलाके के भायावदर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यौन क्षमता (स्टेमिना) बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवाएं बेचने के नाम पर चल रहे तीन फर्जी कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया है। इस धोखाधड़ी के जाल में देशभर के करीब 2,000 से अधिक ग्राहकों को निशाना बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
डॉक्टर बनकर जीतते थे विश्वास
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी bedroomboss9.in जैसी वेबसाइटों और सोशल मीडिया (फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करके ग्राहकों को अपने जाल में फंसाते थे। जब कोई पीड़ित उनके झांसे में आता था, तो कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को सर्टिफाइड डॉक्टर बताकर उनसे बात करते थे और झूठी पहचान देकर उनका विश्वास जीतते थे।
ऑर्डर कैंसल करने पर ब्लैकमेलिंग और धमकी
पुलिस ने बताया कि यदि कोई ग्राहक दवा का ऑर्डर रद्द (कैंसल) करने या मना करने की कोशिश करता था, तो आरोपी अपनी असली औकात पर आ जाते थे। वे ग्राहकों को डराने के लिए अश्लील सामग्री (Porn GIFs) भेजते थे और उनकी निजी जानकारी उनके परिवार व सगे-संबंधियों को उजागर करने की धमकी देते थे। इसके अलावा, ग्राहकों पर झूठे केस दर्ज कराने और आजीवन कारावास (जेल) की धमकी देकर प्रति व्यक्ति ₹1,100 से ₹1,200 या उससे अधिक की जबरन वसूली की जाती थी।
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी
भायावदर पुलिस ने उमियानगर, सिनेमा रोड और मातवा शेरी स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर गिरोह के इन मुख्य सदस्यों सहित 10 लोगों को दबोचा है:
• खोदीदास माकड़िया (उमियानगर ऑफिस का संचालक)
• अहमदराजा मुल्तानी (सिनेमा रोड ऑफिस का संचालक)
• अहमदराजा उर्फ बापू कादरी
• कौशिक वाला
• मीत बेडवा
• चेतन राठौड़
• राजेश परमार
• मनवीर खंभला
• नासिर लाखा
• जील खनिया
(नोट: पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य फरार आरोपियों जैसे हार्दिक खंभला, जयदीप गोहिल और राहुल की सरगर्मी से तलाश कर रही है।)
लाखों का माल जब्त और कानूनी कार्रवाई
राजकोट ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (SP) विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और इंटरनेट राउटर सहित ₹5.16 लाख का माल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 308(2) (जबरन वसूली), आईटी एक्ट और गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है ताकि ठगी की कुल रकम और नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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