अलीगढ़ उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मामूली पारिवारिक विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। थाना क्वार्सी क्षेत्र की ज्वालापुरी पुलिस चौकी से जुड़ा है । घटना में पत्नी के साबुन से नहाना पति को इस कदर महंगा पड़ा कि पहले तो उसे पुलिस ने घर से उठा लिया और फिर चौकी में कथित रूप से बेरहमी से पीटा गया।
पति-पत्नी के बीच मामूली बात से शुरू हुआ झगड़ा
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब पति प्रवीण ने गलती से अपनी पत्नी का साबुन इस्तेमाल कर लिया। यह बात पत्नी को इतनी नागवार गुज़री कि उसने पति से झगड़ा शुरू कर दिया। कहासुनी बढ़ते-बढ़ते इस कदर बिगड़ गई कि पत्नी ने 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस बुला ली।
पुलिस पर थर्ड डिग्री का आरोप
प्रवीण का कहना है कि पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो वह खुद ही उनके साथ जाने को तैयार था। लेकिन फिर भी मौके पर मौजूद दरोगा ने उसे थप्पड़ मार दिया और फिर उसे चौकी ले जाया गया। वहां पुलिस वालों ने कथित रूप से उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। प्रवीण ने आरोप लगाया कि चौकी में डंडे से इतनी पिटाई की गई कि उसकी हाथ की उंगलियों से खून बहने लगा और गंभीर चोटें आईं।
प्रवीण का यह भी कहना है कि चौकी में उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया और बिना किसी ठोस वजह के शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उसने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आपबीती साझा की और पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े किए।
मां ने भी लगाए बहू पर गंभीर आरोप
प्रवीण की मां कुसुमा ने भी बहू पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बहू झगड़ालू प्रवृत्ति की है और आए दिन किसी न किसी बात पर विवाद करती रहती है। पहले भी कई बार वह मायके वालों को बुलाकर माहौल खराब कर चुकी है। इस बार तो केवल साबुन को लेकर बहस हुई थी, जिसे इतना बड़ा रूप दे दिया गया कि बेटा जेल की दहलीज तक पहुंच गया।
पुलिस का पक्ष
इस मामले पर अलीगढ़ पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें 12 जून को पति-पत्नी के बीच घरेलू हिंसा की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पत्नी घायल अवस्था में मिली, जिसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक, पति के खिलाफ **निरोधात्मक कार्रवाई** की गई थी, जो कानून के तहत वैधानिक प्रक्रिया है। हालांकि, मारपीट के आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग पुलिस की कार्यप्रणाली और घरेलू विवादों में एकतरफा कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस की संवेदनहीनता और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करती हैं।
निष्कर्ष
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटे-छोटे घरेलू विवाद अगर समय रहते नहीं सुलझाए गए तो वे किस हद तक बढ़ सकते हैं। साथ ही, यह मामला पुलिस के व्यवहार और थानों में होने वाले कथित टॉर्चर पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।
