शायर हाजी मुंतखब मियां सकलैनी का निधन। ककराला में सुपुर्देखाक किया गया।
अदबी दुनिया और ककराला बस्ती में शोक का माहौल।
कई बार मुंबई के मुशायरों में आप तशरीफ लाए थे।

संवाददाता शोएब म्यानुंर मुंबई
बरेली : दरगाह शाह शराफत अली मियां के सज्जादानशीन रहे शाह सकलैन मियां हूजुर के भाई हाजी मुंतखब अहमद नूर सकलैनी मियां का शुक्रवार सुबह बरेली में एक अस्पताल में दौराने उपचार इंतकाल हो गया। कस्बा ककराला की दीनदार, बा-कमाल अदबी व नामवर शख्सियत जनाब मुंतखब मियां सकलैनी (नूर ककरालवी) के इंतकाल पर जिला अदबी हल्का गमो-अफसोस में डूब गया है। उनका शव देर शाम ककराला लाया गया। शनिवार आठ फरवरी को पूर्वाह्न २ बजे सुपुर्देखाक किया गया। उनके निधन की खबर से काफी संख्या में लोग ककराला पहुंच गए।
हाजी मुंतखब अहमद नूर मियां मुंबई के ऑल इंडिया मुशायरों में कई बार सिरकत की। और अपने रुहानी अंदाज़ में लोगों को नात शरीफ और दुनियावी शायरी सुनाते थे। जहां लोग हाजी मुंतखब मियां की वाह वाही कर उनको नवाज़ते थे। आप एक अदबी कलाम के अच्छे शायर थे और अदबी कलाम के कई सारी किताबें भी आपने लिखी हैं।
दरगाह शाह शराफत अली मियां के मीडिया प्रभारी हमजा सकलैनी ने बताया कि 70 वर्षीय हाजी मुंतखब अहमद नूर सकलैनी बीमार चल रहे थे। शुक्रवार की सुबह उनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। स्वास्थ्य बिगड़ने से उनका बरेली में निधन हो गया। निधन की खबर बहुत तेजी से उनके मुरीदों में फैल गई और दूरदराज के अकीदतमंदों ने दरगाह पर फोन करके गम का इजहार किया गया। आसपास के मुरीदों ने बरेली दरगाह पर जाकर उनका आखिरी दीदार किया।
उधर, उनके ककराला स्थित पैतृक आवास पर खबर सुनते ही लोगों का हुजूम लग गया। सभी उनका शव आने का इंतजार करने लगे। शनिवार की सुबह 11 बजे ककराला मजार पर पहुंचे जहां उन्हें २ बजे सुपुर्दे खाक किया गया। हमजा सकलैनी ने बताया कि अदबी दुनिया में नूर ककरालवी नाम से मशहूर हुए। अदबी खिदमात व शायरी सुनने के लिए तमाम मुरीद थे।
