मुंबईकरों को साफ-सुथरी मुंबई का सपना दिखाने वाली मुंबई मनपा खुद प्लास्टिक कचरे के ढेर तले दबती जा रही है। तमाम अभियानों, नारों और दंड वसूली के बाद भी शहर में प्लास्टिक की बोतलों का अंबार कम होने की बजाय दोगुना हो गया है।
रिपोर्ट की मानें तो २०२३ में जहां ६७ लाख किलोग्राम प्लास्टिक बोतलें इकट्ठा हुई थीं, वहीं २०२४ में यह आंकड़ा बढ़कर १ करोड़ ४२ लाख २३ हजार किलोग्राम तक पहुंच गया। ऐसे में लगता है कि मनपा ने प्लास्टिक संग्रहण में ही कोई नया रिकॉर्ड बनाने की ठान ली है।
मुंबई में हर तरफ एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का बोलबाला है। सब्जियों की थैलियां हों या फलों के पैकेट, हर गली-नुक्कड़ पर प्लास्टिक राज कर रहा है। होटल से लेकर रेलवे पटरियों तक, नाले से लेकर समुद्र तट तक, हर जगह प्लास्टिक की बोतलों ने अपनी सत्ता स्थापित कर ली है। पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक का भी हाल कुछ कम नहीं है। २०२३ में ८५ से ९० लाख किलोग्राम पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक मिला था, जो २०२४ में बढ़कर ९६ लाख ६ हजार किलोग्राम तक जा पहुंचा। ई-कचरा भी कम नहीं हुआ। इस साल ६ लाख १५ हजार किलोग्राम ई-कचरा जमा हुआ है। गौरतलब है कि २००५ की बाढ़ के बाद ५० माइक्रोन से पतली प्लास्टिक थैलियों पर बैन लगाया गया था। मगर हकीकत यह है कि प्लास्टिक की दुकानें और बाजार आज भी चुपचाप फल-फूल रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर ८३३ मामलों में सिर्फ ४१ लाख रुपए का जुर्माना वसूल कर मनपा ने अपनी पीठ खुद थपथपाई है।
