ऐतिहासिक जंजीरे धारावी किले का 288वां विजय उत्सव भायंदर में उत्साह के साथ मनाया गया
Shoaib Miyanoor
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ऐतिहासिक जंजीरे धारावी किले का 288वां विजय उत्सव भायंदर में उत्साह के साथ मनाया गयानजमुल हसन रिज़वीभायंदर: भायंदर के उत्तन क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक जंजीरे धारावी किला का 288वां विजय उत्सव गुरुवार को मीरा भायंदर महानगरपालिका (एमबीएमसी) की ओर से बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किले प्रेमी, नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।ऐतिहासिक महत्व वाले इस किले को मराठा सेनापति चिमाजी अप्पा ने पुर्तगालियों के कब्जे से लंबे संघर्ष के बाद मराठा साम्राज्य में शामिल किया था। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार किले को जीतने के लिए आठ बार युद्ध करना पड़ा था और अंततः नौवें प्रयास में 6 मार्च को विजय प्राप्त हुई थी। इसी ऐतिहासिक दिन को किले के विजय दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।इस वर्ष आयोजित 288वें विजय उत्सव का आयोजन मीरा-भायंदर महानगरपालिका द्वारा किया गया, जिसमें जंजीरे धारावी किला जतन समिति ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।कार्यक्रम की शुरुआत महापौर डिंपल मेहता और उपमहापौर ध्रुव किशोर पाटील के हाथों किले परिसर स्थित धारावी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात किले के पास में स्थापित मराठा वीर चिमाजी अप्पा की अश्वारूढ़ प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर महापौर डिंपल मेहता ने कहा, “जंजीरे धारावी किला मराठा शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और इसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”उपमहापौर ध्रुव किशोर पाटील ने कहा, “ऐसे आयोजन हमारी ऐतिहासिक विरासत के प्रति जनजागरूकता बढ़ाते हैं और युवाओं में अपने गौरवशाली इतिहास के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं।”कार्यक्रम के अंतर्गत किले के समुद्रतटीय बुर्ज के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रसिद्ध लोककलाकार पूजा सावंत ने ‘शिवगाथा’ कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को मराठा इतिहास की वीरगाथाओं से अवगत कराया। वहीं, महानगरपालिका के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने नृत्य और वक्तृत्व की प्रस्तुतियां भी दीं।इस कार्यक्रम में स्थायी समिति के सभापति हसमुख गेहलोत, विपक्ष के गटनेता जय सिंह ठाकुर सहित कई नगरसेवक, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में जनप्रतिनिधियों और गढ़प्रेमियों ने किले के संरक्षण और उसके ऐतिहासिक महत्व को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया।
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