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खुदाई में मिले करोड़ों के सोने के सिक्कों की चोरी का मामला: टीआई समेत चार पुलिसकर्मी न्यायालय से बरी, फरियादी ही निकले थे आरोपी

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खुदाई में मिले करोड़ों के सोने के सिक्कों की चोरी का मामला: टीआई समेत चार पुलिसकर्मी न्यायालय से बरी, फरियादी ही निकले थे आरोपी

खुदाई में मिले करोड़ों के सोने के सिक्कों की चोरी का मामला: टीआई समेत चार पुलिसकर्मी न्यायालय से बरी, फरियादी ही निकले थे आरोपी

 

विक्रम सेन

 

आलीराजपुर। ब्रिटिशकालीन 241 सोने के सिक्कों की कथित चोरी का चर्चित मामला न्यायालय में अंततः पुलिसकर्मियों के पक्ष में समाप्त हो गया है। न्यायालय ने सोंडवा थाना प्रभारी विजय देवड़ा सहित तीन अन्य पुलिसकर्मियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

 

इस मामले ने वर्ष 2023 में प्रदेशभर में सनसनी फैला दी थी, जब सोंडवा थाना क्षेत्र के ग्राम बैजड़ा निवासी रमकूबाई पति कोकलिया ने दावा किया था कि खुदाई के दौरान उन्हें ब्रिटिशकालीन 241 सोने के सिक्के मिले थे, जिन्हें उन्होंने अपने घर के आंगन में छिपा दिया। गांव में चर्चा फैलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा।

 

क्या था आरोप?

दिनांक 19 जुलाई 2023 को थाना प्रभारी विजय देवड़ा, एएसआई नानजी राठौड़, प्रधान आरक्षक अजय मंडलोई और आरक्षक पप्पू डावर बिना वर्दी के घर पहुंचे और फरियादी रमकूबाई व उसके परिजनों को डराकर सिक्के अपने कब्जे में ले गए — ऐसा आरोप लगाया गया।

इस संबंध में IPC की धारा 379, 323, 506 व SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। राजनीतिक दलों ने भी थाने पर प्रदर्शन किया, और मामला इतना तूल पकड़ गया कि एसआईटी गठित करनी पड़ी।

 

फरियादी बने आरोपी, गुजरात पुलिस ने किया खुलासा

इस पूरे घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ तब आया, जब फरियादियों को ही सोने के सिक्कों की चोरी के मामले में गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नवसारी जिले के बिलीमोरा गांव के शब्बीर भाई की शिकायत पर रमकूबाई, दिनेश, राजू और बाजरीबाई को गिरफ्तार किया गया।

गुजरात पुलिस ने इनसे 199 सोने के सिक्के बरामद किए, जो पहले मामले से अलग पाए गए। गुजरात पुलिस की कार्रवाई में आलीराजपुर पुलिस का सहयोग भी रहा।

 

कोर्ट और एसआईटी की जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट

एसआईटी जांच और न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, 241 में से 238 सिक्के फरियादी व उनके परिजनों से ही अलग-अलग समय में बरामद हुए।

कोर्ट में यह प्रमाणित नहीं हो सका कि पुलिसकर्मियों के पास से कोई सिक्का मिला हो या कोई गवाही उनके खिलाफ हो।

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा:

 

“सिर्फ शक और आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”

 

इस आधार पर टीआई विजय देवड़ा, एएसआई नानजी राठौड़, अजय मंडलोई और पप्पू डावर को बरी कर दिया गया।

एसआईटी ने भी केस में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालांकि विभागीय जांच अभी लंबित है।

 

‘सोना सिक्का कांड’ में अंततः क्या बचा?

मीडिया में इन सिक्कों की अनुमानित कीमत 7 करोड़ रुपये बताई गई थी। परंतु इस पूरे प्रकरण में न पुलिस पर आरोप सिद्ध हुआ, न सिक्कों की वास्तविक संख्या तय हो सकी।

सूत्रों के अनुसार, कई सिक्के अब भी कुछ व्यक्तियों के पास हो सकते हैं, इसलिए दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया गया, ताकि विवाद आगे न बढ़े।

 

यह मामला पुलिस, प्रशासन, राजनीति और जनता के बीच संबंधों की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। आवश्यकता है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित रहे — जैसा इस प्रकरण में हुआ हैं।

हालांकि इस बहुचर्चित मामले में पुलिसकर्मियों को न्याय मिला, लेकिन पुलिस प्रशासन की छवि पर दाग जरूर लगे।

उधर फरियादी पक्ष की भूमिका संदिग्ध बनी रही, और अदालत के निर्णय ने साबित कर दिया कि फर्जी आरोपों से न्यायालय अंधा नहीं होता।

शेष सिक्कों के बारे में अब भी रहस्य बना हुआ है – “राम जाने!”

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