महाकुंभ के बाद लापता हुए 161 पुलिसकर्मी, कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप
FAC News Desk
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महाकुंभ के बाद लापता हुए 161 पुलिसकर्मी, कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप
रिपोर्ट – फरियाद अली
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात 161 पुलिसकर्मियों के लापता होने का मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, ये सभी पुलिसकर्मी महाकुंभ के ड्यूटी से लौटने के बाद छुट्टी पर अपने गृह जनपद गए थे, लेकिन समय पर ड्यूटी पर वापस नहीं आए। पुलिस विभाग की ओर से कई बार नोटिस भेजे जाने और लगातार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद इनका कोई पता नहीं चल सका है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन लापता पुलिसकर्मियों में चारों जोन, पुलिस लाइन, कार्यालय और यातायात विभाग के जवान शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इनकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज दी है।
किस श्रेणी में कितने पुलिसकर्मी लापता?
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 41 पुलिसकर्मी विभिन्न ड्यूटी पर जाने के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। 39 पुलिसकर्मी विभागीय कार्रवाई का सामना करने के बाद से ‘डिसलोकेट’ हैं। वहीं, 34 पुलिसकर्मी छुट्टी पर गए और उसके बाद से अब तक गैरहाजिर हैं। इसके अलावा 27 पुलिसकर्मी बीमारी की छुट्टी पर गए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। 20 पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जो छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अपने गैर जनपद से वापस नहीं आए।
पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन पुलिसकर्मियों को कई बार नोटिस भेजकर हाजिर होने के निर्देश दिए गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस कमिश्नरेट ने लापता कर्मियों की अंतिम सूची बनाकर मुख्यालय को भेज दी है। ऐसे सभी कर्मियों के खिलाफ अनुपस्थित रहने की अवधि के आधार पर बर्खास्तगी या अन्य विभागीय कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रही पुलिसकर्मियों की गैरहाजिरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में तैनाती के दौरान अत्यधिक काम के दबाव और छुट्टी के बाद समय पर ड्यूटी पर लौटने के प्रति लापरवाही इसके पीछे मुख्य कारण हो सकते हैं। वहीं, कुछ मामलों में व्यक्तिगत समस्याएं या गृह जनपद में अन्य कार्यों में व्यस्तता भी सामने आ रही है।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जल्द ही ये पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं लौटे तो उनकी सेवा समाप्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पुलिस प्रशासन की सख्ती की भी परीक्षा ले ली है।
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