पत्रकार एल.एन. सिंह ‘पप्पू’ की नृशंस हत्या से प्रयागराज में सनसनी; पत्रकार समाज में गहरा आक्रोश
FAC News Desk
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पत्रकार एल.एन. सिंह ‘पप्पू’ की नृशंस हत्या से प्रयागराज में सनसनी; पत्रकार समाज में गहरा आक्रोश
संवाददाता फरियाद अली
*प्रयागराज।* सिविल लाइंस इलाके में देर रात घटी दिल दहला देने वाली घटना; 20-25 वार कर मौत के घाट उतारा
प्रयागराज में शनिवार देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई जब शहर के जाने-माने और बेबाक पत्रकार एल.एन. सिंह ‘पप्पू’ की कुछ अज्ञात हमलावरों ने निर्मम हत्या कर दी। सिविल लाइंस इलाके में हुई इस घटना में हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला किया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, एल. एन. सिंह पर करीब 20 से 25 बार वार किए गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
एल.एन. सिंह लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय थे और अपनी निर्भीक पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते थे। उनके निधन की खबर से न केवल मीडिया जगत, बल्कि पूरे शहर में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
लोकतंत्र की आवाज़ पर सीधा हमला: IRA
इस नृशंस हत्या के बाद इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन (IRA) ने कड़ा रुख अपनाया है। IRA ने घटना की निंदा करते हुए इसे सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज़ पर सीधा हमला बताया है। IRA के अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा, अब खामोशी नहीं चलेगी — पत्रकार सुरक्षा कानून बने, न्याय मिले!
पत्रकार संगठनों ने तुरंत कार्रवाई और न्याय की मांग करते हुए प्रमुख माँगे उठाई हैं:
फास्ट ट्रैक कोर्ट आरोपियों को शीघ्र और कठोरतम सज़ा दी जाए।
पत्रकार सुरक्षा कानून देश में तुरंत पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।
परिवार को सहायता मृतक के परिवार को उचित मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
पारदर्शी जाँच मामले की हर परत खोली जाए और हत्या के पीछे के सभी सहयोगियों पर कार्रवाई हो।
पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार
इस बीच, पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. अजय पाल शर्मा ने पत्रकार समाज को सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया है। IRA ने पुलिस के इस आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा, अब न्याय में देरी नहीं, दृढ़ता चाहिए।
पत्रकार समुदाय ने एकजुटता दिखाते हुए श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित करने की घोषणा की है। पत्रकारों का स्पष्ट संदेश है कि जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होता, तब तक उनकी आवाज़ सड़क से संसद तक गूंजती रहेगी।
यह हत्या नहीं, लोकतंत्र की कलम पर हमला है। सच की लड़ाई अब और तेज़ होगी।
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